Thursday, January 3, 2008

दोस्तो, मिठाइयों के ऊपर लगे चांदी के वर्क के बारे में आप क्या कहते हैं ?


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

दोस्तो, इस के बारे में मेरा तो यह दृढ़ विश्वास यही है कि कुछ कुछ केसों में तो ये और कुछ भी हो, चांदी तो हो नहीं सकती। जिस जमाने में पनीर, दूध, दही तो हमें शुद्ध मिलता नहीं, ऐसे में मिठाईयों के ऊपर शुद्ध चांदी के वर्क लगे होने की खुशफहमी पालना भी मेरी नज़र में मुनासिब नहीं है। तो दोस्तो, मैंने इस समस्या से जूझने का एक रास्ता निकाल लिया है-- वैसे तो हम लोग मिठाई कम ही खाते हैं, लेकिन अगर यह सो-काल्ड चांदी के वर्क वाली मिठाई खाने की नौबत आती भी है तो पहले तो मैं चाकू से उस के ऊपर वाली परत पूरी तरह से उतार देता हूं। दोस्तों, कुछ समय पहले मीडिया में भी इसे अच्छा कवर किया जाता रहा है कि मिलावट की बीमारी ने इस वर्क को भी नहीं बख्शा ....कई केसों में इसे एल्यूमीनियम का ही पाया गया है। अब आप यह सोचें कि अगर यह एल्यूमीनियम का वर्क हम अपने शरीर के सुपुर्द कर रहे हैं तो यह हमारे गुर्दों की सेहत के साथ क्या क्या खिलवाड़ न करता होगा। इस लिए,दोस्तो, चाहे यह मिठाई महंगी से महंगी दुकान से खरीदी हो, मैं तो इस वर्क को खाने का रिस्क कभी भी नहीं लेता। आप भी कृपया आगे से ऐसी मिठाईयां खाने से पहले इस छोटी सी बात का ध्यान रखिएगा---दोस्तो, वैसे ही हमारे चारों इतनी प्रदूषण --जी हां, सभी तरह का-- फैला हुया है , ऐसे में चांदी के वर्क के चक्कर में न ही पड़ें तो ठीक है। यह तो हुई,दोस्तो, इन वर्कों की बात, तो इन में इस्तेमाल रंगों एवं फ्लेवरों की बात कभी फिर करते हैं।
Good morning, friends !!

2 comments:

Raviratlami said...

अल्यूमिनियम से याददाश्त पर भी दुष्परभाव पड़ता है ऐसा मैंने भी कहीं पढ़ा था...

BalMukund Agrawal said...

इस ओर तो ध्यान हीं नहीं गया था.खैर अब मिठाईयों का छिलका उतार कर खाया करेंगे.जानकारी के लिए धन्यवाद.